आज मैं आपको एक ऐसी कहानी सुनाने जा रहा हूं बहू की जली रोटी | Hindi Kahaniya | StoryTime | Saas Bahu | New Story | Kahaniya | Hindi Stories जो एक गांव में एक रक्षा बोलकर बच्ची रहती थी वह बहुत अच्छी रोहित आती थी थोड़ी जला देती थी मैं हम देखते हैं इस कहानी में.
बहू की जली रोटी | Hindi Kahaniya | StoryTime | Saas Bahu | New Story | Kahaniya | Hindi Stories.
एक छोटे से गांव में एक संतानी घर में शांति से रहती थी। उनका परिवार बहुत संपन्न था और उन्हें कोई कमी नहीं थी। घर में दो लोग रहते थे - दादी माँ और बहु। दादी माँ अपने उम्र के कारण बहुत कम बोलती थी और बहु घर के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य थी।
बहु बहुत ही सुंदर थी और उसकी सौंदर्य से सभी लोग वाकिफ थे। उसका सबसे खास अंग उसके होठ थे, जो सभी को अपनी तरफ खींचते थे। लोग उसे जल्द से जल्द शादी करना चाहते थे, लेकिन बहु शादी से इनकार करती थी। वह अपने पैरों पर खड़ी होकर जीवन जीना चाहती थी।
बहु को खाना बनाना नहीं आता था, इसलिए दादी माँ हमेशा खाना बनाकर उसे खिलाती थी। दादी माँ बहु के लिए हमेशा समझदारी रखती थी, लेकिन बहु हमेशा उसे इशारों से बताती थी कि उसे ऐसा खाना नहीं चाहिए था।
एक दिन, बहु के खाने में जली रोटी थी। बहु ने उसे उगल दिया था, लेकिन वह खाने को नहीं चाहती थी। वह जानती थी कि
वह जानती थी कि दादी माँ ने खाना उसकी मनपसंद चीज बनाकर दिया होगा, लेकिन फिर भी उसे उस खाने में कोई खास स्वाद नहीं आ रहा था। बहु दादी माँ को नहीं बता सकती थी कि उसे खाना अच्छा नहीं लग रहा था, क्योंकि उसे अपनी इस बात पर शर्म आ रही थी।
दादी माँ ने बहु को देखा और पूछा, "तुम्हें खाना अच्छा नहीं लग रहा है?"
बहु ने हाँ कह दिया और उसने कहा, "मुझे खाना बनाना सीखना चाहिए।"
दादी माँ ने बहु की इस इच्छा को समझा और उसे खाना बनाना सिखाने का फैसला किया। दादी माँ ने बहु को खाना बनाने की विधि बताई और उसे सारे सामान की सूची दी।
बहु ने खाना बनाने की विधि को समझा और खाना बनाना शुरू किया। वह धीरे-धीरे खाना बनाने में माहिर होती गई और दादी माँ ने उसे अपना खाना खुद बनाने की अनुमति दी।
बहु ने खुशी से दादी माँ के लिए खाना बनाना शुरू किया। वह धीरे-धीरे खाने में माहिर होती गई और दादी माँ को खाना बनाने म
ें आनंद आने लगा। दादी माँ ने उसे खुशी से दाने दिए और उसे बधाई दी कि वह अब खाना अच्छी तरह से बना सकती है।
बहु अब हर दिन खाना बनाने की अनुमति मिली थी और उसने इस कौशल को और अधिक सुधारा। अब उसके खाने में असली स्वाद आने लगा था और सभी उसके बनाए हुए खाने को बहुत पसंद करने लगे थे।
इस तरह, बहु ने खाना बनाना सीखा और उसकी इच्छा को पूरा कर लिया। दादी माँ ने उसे खाना बनाने की विधि सिखाई और उसे अपनी मनपसंद खाना बनाने की अनुमति दी। इस तरह, बहु ने अपनी इच्छा पूरी की और उसे एक सम्मानित खाने वाली खाने वाली बहु बनाया।
यह कहानी हमें यह बताती है कि हमें कभी भी शर्म नहीं आनी चाहिए अपनी इच्छाओं को पूरा करने में। हमें उन्हें साझा करना चाहिए और अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। यदि हम इसे कर सकते हैं, तो हम सफलता पा सकते हैं और अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।
कहानी का नैतिक
यही है कि आप अपने वादे की बात सुने जैसा बड़े कहते हैं महिति सुने और वार्षिक कम करें उनके नक्शे कदम पर चले चुके बढ़ाने आपसे ज्यादा जूनियर देखी है और सब भी है आप अभी अंडे के छिलके है धन्यवाद दोस्तों

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